रौशन गुप्ता (गोविंदपुर नवादा)
कोरोना संक्रमण के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने राज्य में आंशिक लॉकडाउन लगाया था। इसके बाद बाजारों एवं खाद्य पदार्थ विक्रेताओं की ओर से जहां माल की आपूर्ति नहीं होने या फिर मांग से कम आपूर्ति होने की बात कह खाद्य पदार्थो के दाम में वृद्धि कर दिया गया था। दुकानदारों की बातों पर कितनी सच्चाई है यह आमजन नहीं जानते, क्योंकि क्षेत्र में इन सबका मॉनिटरिग करने वाला कोई विभाग नहीं है। दूसरी ओर दुकानदार एक्सपायरी हो चुके पदार्थो की भी बिक्री कर दे रहे हैं। ऐसा ही कुछ नवादा के गोविंदपुर में देखने को मिल रहा है।इसमें छोटी दुकानों से लेकर बड़े स्टोर्स तक शामिल हैं। जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जांच-पड़ताल नहीं होने से ऐसे दुकानदार बेखौफ होकर अमान्य सामान बेच रहे हैं। इधर जानकारेा की मानें तो स्टोर्सवाले ऐसी चीजें ग्रामीण क्षेत्रों के विक्रेताओं एवं पार्टियों में ज्यादा खपाने का प्रयास करते हैं। कारण कि मुहल्लों और ग्रामीण इलाकों में लोग एक्सपायरी तिथि पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। कुछ खुदरा दुकानदारों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि बड़े व्यवसायी एक्सपायरी पदार्थ को वापस करने, लोडिग-अनलोडिग के तमाम झंझटों व खर्चो से बचने के लिए पार्टियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों को ज्यादा छूट देकर खपा देते हैं। पुराना माल पार्टियों में आसानी से खपा दिया जाता है। पार्टी में नमकीन, कोल्ड ड्रिक्स, चिप्स आदि खोलकर परोसे जाते हैं। वहां पर कोई नहीं देखता कि एक्सपायरी डेट का सामान उन्हें परोसा जा रहा है। इसी तरह पाउच फटने या एक्सपायरी डेट आने पर कुकिग ऑयल, बटर, चीज, घी आदि को भी खपा दिया जाता है। अमान्य तिथि की खाद्य पदार्थो को बेचनेवालों के खिलाफ एफएसएसएआइ के नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। जिसके तहत कम से कम 25 हजार से अधिकतम दो लाख रुपये तक जुर्माना लग सकता है। साथ ही कम से कम तीन महीने की सजा का प्रावधान भी है।